राजसमंद। हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मेवाड़ में भव्य आयोजन हो रहे हैं। अरावली की पर्वतमालाओं के बीच स्थित हल्दीघाटी आज भी वीरता, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की अमर गाथा का प्रतीक मानी जाती है। महाराणा प्रताप ने अपने जीवन में कभी भी मुगलों की अधीनता स्वीकार नहीं की और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष जारी रखा।
उदयपुर में विराट कार्यक्रम
हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में उदयपुर के गांधी ग्राउंड में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से विराट कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डॉ. मोहन भागवत और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा शामिल हुए। आयोजन में मेवाड़ सहित देशभर से 35 हजार से अधिक लोग पहुंचे। आगंतुकों का स्वागत हल्दीघाटी की पवित्र मिट्टी से तिलक लगाकर किया गया।
मोती मगरी पर विशेष पूजा-अर्चना
उदयपुर के मोती मगरी स्मारक पर महाराणा प्रताप के वंशज डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने चेतक पर सवार महाराणा प्रताप की अश्वारूढ़ प्रतिमा पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने भी वीर प्रताप को नमन किया।
18 जून 1576 को हुआ था हल्दीघाटी का युद्ध
राजसमंद जिले के खमनोर स्थित हल्दीघाटी दर्रे में 18 जून 1576 को महाराणा प्रताप और मुगल सेना के बीच ऐतिहासिक युद्ध लड़ा गया था। मुगल बादशाह अकबर मेवाड़ को अपने अधीन करना चाहता था, लेकिन महाराणा प्रताप ने आत्मसमर्पण से इनकार कर दिया। उनके साथ भील समाज के वीर, हकीम खान सूरी, झाला मान सिंह, रामशाह तोमर सहित अनेक योद्धा युद्ध में शामिल हुए।
मिट्टी से तिलक लगाकर घर ले जाते हैं लोग
हल्दीघाटी की मिट्टी को आज भी लोग श्रद्धा और बलिदान का प्रतीक मानते हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु इस मिट्टी से तिलक लगाते हैं और इसे अपने साथ घर भी ले जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह भूमि राष्ट्रभक्ति और बलिदान की प्रेरणा देती है।
एशिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक चंदन वन
हल्दीघाटी के आसपास का क्षेत्र प्राकृतिक चंदन के घने जंगलों के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां हजारों की संख्या में सफेद चंदन के पेड़ हैं, जिनका संरक्षण वन विभाग की देखरेख में किया जा रहा है। इस क्षेत्र में पैंथर, लकड़बग्घा, सियार सहित कई वन्यजीव भी पाए जाते हैं।
17 से 19 जून तक होंगे विशेष आयोजन
हल्दीघाटी महोत्सव के तहत 17 से 19 जून तक तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। पहले दिन रक्त तलाई पर श्रद्धांजलि, शोभायात्रा और उद्घाटन समारोह हुआ। दूसरे दिन खेलकूद प्रतियोगिताएं, चेतक अश्व मेला और भजन संध्या का आयोजन होगा। तीसरे दिन खेल प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा और कवि सम्मेलन आयोजित होगा।

