बेंगलुरु: कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री एवं कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) अध्यक्ष D. K. Shivakumar ने केंद्र सरकार के ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ (ONOE) प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इसे संघीय ढांचे, राज्यों की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा बताया।
संवाद कार्यक्रम में जताई आपत्ति
शनिवार को एक निजी होटल में संयुक्त संसदीय अध्ययन समिति द्वारा आयोजित संवाद कार्यक्रम में D. K. Shivakumar ने कहा कि यह प्रस्ताव राजनीतिक लाभ के लिए तैयार किया गया है और इसका उद्देश्य क्षेत्रीय दलों तथा विपक्ष की आवाज को कमजोर करना है।
उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार और कांग्रेस पार्टी इस प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज करती है।
कर्नाटक विधानसभा पहले ही पारित कर चुकी है प्रस्ताव
डी.के. शिवकुमार ने बताया कि कर्नाटक विधानसभा पहले ही ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर चुकी है। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान उस प्रस्ताव के कुछ अंश पढ़कर सुनाए और विधानसभा द्वारा पारित प्रति संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष P. P. Chaudhary को सौंपी।
क्या है ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ योजना
‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का मतलब लोकसभा, सभी राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था से है। केंद्र सरकार का कहना है कि इससे चुनावी खर्च कम होगा और प्रशासनिक कार्यों में बार-बार होने वाला व्यवधान रुकेगा।
हालांकि कई विपक्षी दल और राज्य सरकारें इसे संघीय व्यवस्था के खिलाफ बता रही हैं।
व्यवहारिकता पर उठाए सवाल
डी.के. शिवकुमार ने कहा कि अलग-अलग राज्यों में चुनाव अलग-अलग समय पर होते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कर्नाटक में तीन वर्ष पहले चुनाव हुए थे, जबकि तमिलनाडु और केरल में हाल ही में चुनाव संपन्न हुए हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में सभी राज्यों के चुनाव एक साथ कैसे कराए जा सकते हैं।
सरकार गिरने की स्थिति पर मांगा जवाब
उन्होंने कहा कि यदि किसी राज्य में सरकार कार्यकाल के बीच गिर जाए या बहुमत खो दे, तो उस स्थिति में क्या व्यवस्था होगी, इस पर केंद्र सरकार ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है।
डी.के. शिवकुमार ने आरोप लगाया कि यह योजना क्षेत्रीय दलों और विपक्षी आवाजों को दबाने की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।

