मैसूरु : राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने समाज में भेदभाव खत्म करने के लिए अंतरजातीय विवाहों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल जातिगत भेदभाव का फायदा उठाते हैं और समाज को जाति आधारित सोच से बाहर आना होगा।
JSS महाविद्यापीठ में दिया संबोधन
मोहन भागवत ने मैसूरु में JSS महाविद्यापीठ में आयोजित विशेष व्याख्यान को संबोधित करते हुए लोगों से जाति आधारित भेदभाव को भूलने और संविधान व कानून से आगे बढ़कर सामाजिक सुधार के लिए सक्रिय कदम उठाने का आह्वान किया।
अंतरजातीय विवाह का समर्थन करने की अपील
उन्होंने कहा कि केवल कानूनों पर निर्भर रहने के बजाय समाज को सकारात्मक कदमों का समर्थन करना चाहिए। भागवत ने कहा कि अंतरजातीय विवाह करने वाले लोगों का समर्थन किया जाना चाहिए।
राजनीति और जाति पर टिप्पणी
मोहन भागवत ने कहा, “राजनीतिज्ञ जाति का फायदा उठाते हैं। वे काम के आधार पर वोट नहीं पा सकते लेकिन जाति के जरिए वोट हासिल कर लेते हैं। समाज को जाति को भूलना होगा, तब राजनीति खुद सुधर जाएगी।”
एमएस गोलवलकर का उल्लेख
RSS प्रमुख ने कहा कि संघ के दूसरे सरसंघचालक एमएस गोलवलकर भी अंतरजातीय विवाह के समर्थक थे। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में 1942 में हुए पहले अंतरजातीय विवाह पर डॉ. भीमराव आंबेडकर और एमएस गोलवलकर दोनों ने शुभकामना संदेश भेजे थे।
भाषा और व्यवहार में बदलाव की बात
भागवत ने लोगों से रोजमर्रा की भाषा और व्यवहार में भी बदलाव लाने की अपील की। उन्होंने कहा कि कई शब्द और व्यवहार ऐसे होते हैं जो अनजाने में भेदभाव को दर्शाते हैं।
संवेदनशीलता पर जोर
उन्होंने कहा कि लोगों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उनके व्यवहार या शब्दों से किसी व्यक्ति को दूरी या भेदभाव महसूस न हो। उन्होंने छोटे-छोटे सामाजिक सुधारात्मक कदमों से शुरुआत करने पर जोर दिया।

