Monday, July 15, 2024
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जयकारों से धर्ममयी हुई बारवा नगरी प्रतिष्ठा महोत्सव में उमड़ा जनसैलाब

बाली : उपखंड के बारवा गांव में लक्ष्मी नारायण धाम व संत आत्मानंद धाम में संत आत्मानंद सरस्वती महाराज की समाधि स्थल पर निर्मित मंदिर का तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव धूमधाम से आयोजित हुआ। जगतगुरु शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती, आसोतरा धाम के गादीपति तुलसारामजी महाराज, देवानंदजी महाराज, बालकदासजी महाराज, दीनदयालजी महाराज, खेतेश्वर गोशालाश्रम इन्द्रप्रस्थ खिरोडी महाराज गोवत्स विठ्ठलकृष्ण विठ्ठलश्री सहित देश के विभिन्न भागों से आए साधु-संतों, साध्वी के सान्निध्य में प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ।

राजपुरोहित समाज के स्वामी आत्मानंद सरस्वती धाम पर आयोजित प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान कार्यक्रम में करीब 20 हजार से अधिक श्रद्धालु बारवा गांव पहुंचे। यहां पर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त रहे। इस दौरान हजारों वाहन खड़े करने के लिए खेतों में पार्किंग व्यवस्था की गई। बारवा आने के लिए अलग-अलग चार प्रमुख मार्ग पर समारोह स्थल से कुछ पहले की गई व्यवस्था के कारण बाहर से आने वाले राजपुरोहित समाज के प्रतिनिधियों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ा।

प्रतिष्ठा महोत्सव का कार्यक्रम हर्षोल्लास के साथ ब्रह्म मुहूर्त में वैदिक मंत्रों के साथ संपन्न हुआ। देश-विदेश के विभिन्न भागों से आए राजपुरोहित समाज के सदस्य के सम्मान में गांव के युवाओं, आयोजक मंडल के पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं में कोई कसर नहीं छोड़ी। प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान बाली पंचायत समिति के पूर्व प्रधान जेठू सिंह परिवार की तरफ से वर्तमान सरपंच इंदु चंदनसिंह राजपुरोहित ने समारोह में हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा करने का जिम्मा लिया था।

विषम परिस्थितियों के कारण हेलीकॉप्टर दोपहर बाद बारवा गांव में उतर पाया। पुष्प वर्षा का कार्यक्रम दोपहर बाद आयोजित हुआ। तीसरे दिन करीब 100 से अधिक दानदाताओं का सम्मान किया गया। देश-विदेश से आए अतिथियों का भी बहुमान किया गया। आत्मधाम सेवा समिति बारवा, लक्ष्मी धाम सेवा समिति बारवा, गोशाला समिति बारवा, राजपुरोहित प्रवासी युवाओं एवं रोहिणी मित्र मंडल बारवा के पदाधिकारी व सदस्यो का सम्मान किया गया। गोवत्स विठ्ठलकृष्ण विठ्ठलश्रीपी महाराज ने स्वामी आत्मानंद सरस्वती के हाथों से प्रारंभ की गई 19 संस्थाओं को गति देने के लिए व संत आत्मानंद सरस्वती का सौवे वर्ष के उपलक्ष में जन्म शताब्दी समारोह मनाने को लेकर चर्चा की। महाप्रसादी के आयोजन व धार्मिक समारोह के बाद संतों का यहां से विधिवत प्रस्थान कार्यक्रम आयोजित हुआ।

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