फतेहपुर, जुलाई 2025: सोशल मीडिया पर वायरल हुआ विकास दुबे का दावा — कि उसे 40 दिनों में 7 बार सांप ने काटा — पूरी तरह फर्जी निकला है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में सामने आया कि विकास को केवल एक बार ही सांप ने डसा था। साथ ही डॉक्टरों ने ‘स्नेक फोबिया’ की पुष्टि की है और मानसिक स्वास्थ्य जांच की सिफारिश की है।
विकास दुबे का अजीब दावा, सांप ने दिया था “सपना”
फतेहपुर जिले के मलवा थाना क्षेत्र के सौरा गांव निवासी 24 वर्षीय विकास दुबे उस वक्त सुर्खियों में आया, जब उसने यह सनसनीखेज दावा किया कि 40 दिनों में उसे 7 बार सांप ने डसा। उसने बताया कि वो सांप से बचने के लिए अपनी मौसी और चाचा के घर तक गया, लेकिन सांप ने वहां भी उसका पीछा नहीं छोड़ा।
इतना ही नहीं, विकास ने यह भी कहा था कि सांप ने उसे सपने में आकर चेतावनी दी थी कि वह कुल 9 बार उसे डसेगा, जिनमें से 8 बार वह बच जाएगा, लेकिन 9वीं बार उसे कोई नहीं बचा पाएगा।
सीएमओ ने गठित की जांच टीम, सिर्फ एक बार ही डसा गया
इस विचित्र दावे के बाद, जिला प्रशासन ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को जांच के आदेश दिए। CMO ने तीन सदस्यीय चिकित्सीय टीम गठित की, जिसमें शामिल डॉक्टरों ने अस्पताल में विकास के इलाज के रिकॉर्ड और संबंधित डॉक्टर से बातचीत की। जांच में साफ हुआ कि विकास को सिर्फ 2 जून को ही पहली बार अस्पताल में भर्ती किया गया और उसी दिन उसे एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन दिया गया।
पुरानी पोस्ट फिर वायरल, झूठा दावा फैला रहा भ्रम
सोशल मीडिया पर 16 जुलाई 2024 की एक पुरानी पोस्ट फिर से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया गया कि विकास दुबे को 40 दिनों में 7 बार सांप ने डंसा। यह दावा न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि झूठा भी साबित हुआ
रिपोर्ट में हुआ स्नेक फोबिया का खुलासा
जांच में यह बात भी सामने आई कि विकास दुबे को “स्नेक फोबिया” है — यानी उसे सांपों को लेकर मानसिक भ्रम और डर है। चिकित्सकीय टीम ने यह भी सुझाव दिया कि विकास को मानसिक रोग विशेषज्ञ से परामर्श दिलाया जाए। डिप्टी सीएमओ आरके वर्मा ने पुष्टि की कि 6 अन्य बार इलाज में कोई सांप काटने के प्रमाण नहीं मिले।
प्रशासन से मांगी थी मदद, दहशत में था परिवार
विकास और उसके परिजनों ने दावा किया था कि सांप के सपने और लगातार डसने की घटनाओं से वे दहशत में हैं और उन्होंने शासन-प्रशासन से मदद की गुहार लगाई थी। इसी के बाद जांच के आदेश दिए गए थे। अब इस पूरे मामले को स्थानीय प्रशासन ने मनोवैज्ञानिक उपचार की दिशा में मोड़ दिया है।