Tuesday, July 16, 2024
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गुजरात में स्थायी शिक्षकों की भर्ती को लेकर गांधीनगर में युवाओं का प्रदर्शन, पुलिस ने हिरासत में लिया

अहमदाबाद : गुजरात के गांधीनगर शहर में सरकारी नौकरी को लेकर प्रदर्शन कर रहे करीब 300 अभ्यर्थियों को मंगलवार को पुलिस ने हिरासत में लिया।पुलिस ने बताया कि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। पुलिस के अनुसार ये अभ्यर्थी परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं, लेकिन अभी तक स्कूल शिक्षक के तौर पर इन्हें नियुक्ति नहीं मिली। गांधीनगर जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) रवि तेजा वासमसेट्टी ने बताया कि गुजरात कांग्रेस विधायक एवं प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जिग्नेश मेवाणी को भी पुलिस ने विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए हिरासत में लिया।

एसपी ने कहा, ‘हमने बिना अनुमति के विरोध प्रदर्शन करने के लिए मेवाणी और लगभग 300 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को राज्य सचिवालय परिसर के गेट नंबर एक पर इकट्ठा होने के लिए सोशल मीडिया पर आह्वान किया था, जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। हमने देर शाम सभी को रिहा कर दिया। महिलाओं समेत इन आंदोलनकारियों ने राज्य सरकार द्वारा अनिवार्य ‘शिक्षक पात्रता परीक्षा’ (टीईटी) और ‘शिक्षक योग्यता परीक्षा’ (टीएटी) पास की है।

नियमों के अनुसार, सरकारी और अनुदान प्राप्त स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षक की नौकरी पाने के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। दूसरी ओर, इन स्कूलों में कक्षा 9 से 12 तक के शिक्षक बनने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए टीएटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि राज्य सरकार सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरे ताकि उन्हें नियमित नौकरी मिल सके। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि वे काफी समय से घर पर बेकार बैठे हैं क्योंकि राज्य सरकार टीईटी/टीएटी अभ्यर्थियों को नियमित शिक्षकों के रूप में भर्ती करने को लेकर इच्छुक नहीं है।

मेवाणी के अनुसार, गुजरात भर में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के लगभग 17,000 पद खाली पड़े हैं। लगभग 90,000 टीईटी/टीएटी पास अभ्यर्थी बेरोजगार हैं क्योंकि राज्य सरकार ने उनके लिए भर्ती शुरू नहीं की है। कांग्रेस विधायक ने हिरासत में लिए जाने से पहले चेतावनी देते हुए कहा, ‘ये बेरोजगार युवा मांग कर रहे हैं कि उन्हें नौकरी दी जाए, लेकिन सरकार ने उनकी कभी नहीं सुनी। इसलिए वे अपनी मांग उठाने के लिए गांधीनगर में एकत्र हुए। सरकार चाहे तो उन्हें स्थायी नौकरी दे सकती है। अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो हम आंदोलन तेज करेंगे।

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